Great Kabir Das detailed Biography In Hindi : Top 50 Facts of Kabir Das – Latest Updates of 2021 Proudly Posted By Yellow Destiny

KABIR DAS-  जिनके नाम का अर्थ होता है महान,कहते है पेसे से वह बुनकर थे,कपड़ा बुनने का काम करते थे लेकिन उन्होंने इस समाज के लिए ऐसी बाते बुनकर-कहकर चले गए जिनके बिना आज भारत की कहानी अधूरी है ।। कबीर जी आज से 600साल पहले के थे , लोग कहते है आज अगर वे होते तो आज उन पर कई सारे मुक्कदमे हो चुके होते।।

KABIR DAS|KABIR KE DOHE

KABIR DAS IN HINDI – KABIR DAS BIOGRAPHY IN HINDI  –  SANT KABIR  -ABOUT KABIR DAS IN HINDI-

चलिए शुरू करते है कबीर को समझना और कबीर मैं खुद को दखते है और खुद में कबीर को।।कबीर

ना ही गरीब है और ना ही धनी वह हर एक इंसान में है।।कबीर को कुछ लोग भगवान मानते है ,कुछ

लोग उन्हें फकीर ,तो कुछ लोग उन्हें भगवान का अभ्तार,तो कुछ लोग कबीर को भगवान राम का भक्त

मानते है कुछ लोग उन्हें संत ,गुरु , कवि मानते है ,सबके अपने अपने कबीर ।।

कबीर के जीवन का ज्यादा समय काशी-वाराणसी में गुजरा था।।काशी के लहरतारा तालाब से जुड़ी है

कबीर के जन्म की कहानी।।कबीर को एक विधवा ब्राह्मणी ने जन्म दिया था,वह नवजात शिशु को

लहरतारा तालाब के पास छोड़ कर चली गई।।नीरू और लीमा नाम के एक मुसलमान दम्पत्ति वालक

को अपने घर ले गए।।और उन्होंने है कबीर का लालन पालन किया ।।

SANT KABIR INFORMATION IN HINDI

वीर पंथ की एक दूसरी धारा के मुताबिक कबीर लहरतारा तालाब में एक गुलाब के फूल मैं वाल रूप में

प्रकट हुए थे ।।कबीर के जन्म को लेकर बहत से कवि ने अपने अपने मत प्रकट किए ।।कबीर को

अपने जन्म से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि उनका जन्म कहा हुआ या उनके मातापिता मुसलमान थे

हिन्दू या कोई और किसी दूसरे धर्म के थे ।।

KABIR DAS    SANT KABIR DAS   –   KABIR DAS INFORMATION IN HINDI  –   INFORMATION ABOUT KABIR DAS IN HINDI

कबीर जिस काल मैं हुए उस काल को इतिहासविद मध्यकाल कहते है।। यह वह काल था जब राजनीति

में  मुसलमान सामंत छोटे राजा खुदको स्थापित कर रहे थे।।दिल्ली के गद्दी पर लगभग 200साल तक

मुसलमान सुल्तानो का राज चला आ रहा था।।इस्लाम खुद एक संघटित सम्प्रदाय था, उस समयकाल मैं ब्राह्मण सम्प्रदाय को और उनसे जुड़ी जात पात को चुनौती दे रहा था ।।

कबीर जहा पले बढ़े वोह जगह अब वाराणसी का कबीरचोरा है।।कहा जाता है यह कबीर चोरा कबीर

के लालन पालन करने वाले नीरू और लीमा का घर हुए करता था।।कबीर जब बड़े हो रहे थे तब के

हालत सिर्फ कल्पना ही कर सकते है,कबीर जब बड़े हो रहे थे तब के हालत खराब तो थे ही उसके साथ

साथ उनके तेबर ने कबीर और परिवार की परेशानी और बड़ा दिया था।।कबीर जाती धर्म के पाखंड को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।।KABIR DAS BIOGRAPHY   –   KABIR DAS KI JIVANI  –  KABIR DAS KA JEEVAN PARICHAY   –  KABIR DAS STORY IN HINDI  –  SANT KABIR IN HINDI

कबीर ने समाज में जो देखा उसमें तरह तरह के विषमता थी, कोन किस जाती मैं जन्म लिया है वह जाती

ही उसका भाग्य तय करती थी।। बेयक्ती के छोटे या बड़े होने का मापदंड उसका जन्म कुल ही रह गया

था,ब्राह्मण चाहे जितना दुराचारी हो सामान्य था,दलित चाहे
जितना सदाचारी हों नीच समझा जाता था।।कबीर ने इस आधार को नकार दिया।

कबीर की निडर वाणी ने १४ सताब्दी में जब पूरे काशी मैं हड़कंप पैदा करना शुरू किया तब वहां पे 

स्वामी रामानंद  बहत पूजनीय थे,स्वामी रामानंद के १२ शिष्य बताए जाते है जिनमें कबीर की गिनती

भी होती है।। कबीर ने स्वामी रामानंद को अपना गुरु बनाया कैसे या वह खुद रामानंद के शिष्य बने

कैसे इसके पीछे कई लेखक ने कोई सारे बाते की है।।कबीर का रामानंद के शिष्य बनने के पीछे बहत

सारे परिक्षायो से उनको गुजरना पड़ा ।।

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प्रथम बार जब कबीर रामानंद के आश्रम में गए थे तब उनको तिरस्कार का सामना करना पड़ा।।कबीर

शिष्य बनने का प्रस्ताव लेकर स्वामी रामानंद के पास गए पर उन्होंने जाती को धर्म के साथ जोड़कर

कबीर को वही काम करने के लिए आदेश दिया और रामानंद ने कबीर को शिष्य बनाने का प्रस्ताव
ठुकरा दिया।।

काशी के पंचगंगा घाट में रामानंद प्रतिदिन प्रातः स्नान करने के लिए जाते थे ।।यह पंचगंगा घाट रामानंद के आश्रम में हुए कबीर के तिरस्कार का अगली कड़ी का साक्षी था ।।

 

रामानंद जब प्रातः स्नान करने के लिए घाट पर जा रहे थे वहां पे कबीर उनके चरण पादुका के स्पर्श पाने

के लिए घाट पर लेट गए थे और रामानंद ने देखे बिना कबीर को स्पर्श कर लिया और राम राम की ध्वनि

रामानंद के मुख से निकल गया तभी कबीर उठ कर सम्मान के सहित अपने गुरु को उत्तर दिया कि

उन्हें अपने गुरु मंत्र की प्राप्ति हो गई गुरु के स्पर्श और गुरु के मुख से निकले राम राम की ध्वनि सुनकर ।।

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रामानंद को कबीर का शांत और निष्पाप आचरण बहत आकर्षित किया और उनकी कबीर के प्रति

अंदर उठ रही अभिमान और भेदभाव की भावना को हमेशा के लिए दूर कर दिया और कबीर को

रामानंद ने अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया।।

कबीर को मानने वाले एक दूसरे परम्परा के मुताबिक उन्होंने बेष्णव पीताम्बर को अपना गुरु बनाया

था,इस मत के मुताबिक कबीर सत्संग के लिए वैश्णव पीताम्बर के कुटिया में जाते थे और उसे कबीर

हज करना बताते थे,कबीर हिन्दू मुसलमान का भेदभाव नहीं मानते थे।।कबीर के अनेक गुरु थे पर

उन्होंने कभी अख्सर ज्ञान कभी नहीं प्राप्त किया|

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कहा जाता है कि कबीर सतसंग किया करते थे।।कबीर जहा भी जाते वहां पे जनसमगम होता।।आज

कबीर के जीवन से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियों का प्रमाण तो नहीं मिलता पर जनश्रुति कबीर के दोहे

और कबीर की जीवन से जुड़े हर कड़ी मानव समाज हमेशा याद रखता है और उनकी गाथा गाते हुए

कबीर को सम्मान प्रदान करते है ।।

“भारत जितने टुकड़े से बना है उसमे से एक टुकड़ा कबीर कहलाता है” ऐसी जनश्रुति कबीर को प्रसिद्ध

करती है।।कबीर किसी भी धर्म को नहीं मानते थे उनके लिए हर धर्म समान था हर इंसान समान था।।

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“दुई जगदीश कहां ते आए,कहूं कोनेे भरमाया “

“अल्ला राम केशव कबीर,हरी हजरत नाम धराया”

“गहना एक कनक ते गहना, तामें भाव ना दूजा”

“कहन सुनन को दूई कर घाते,एक नेवाज एक पूजा”

“वहीं महम्मद वहीं महादेव,ब्रह्मा आदम कहिए “

“कई हिन्दू कोई तुरक कहावे एक जर्मी पर रहिए”

“वेद किताब वे पड़े कुतबा,वे मौलाना वे पांडे”

“विगत विगत के नाम धरायो, एक माटी के भांडे”

“कह कबीर ते दोनों भुले रामहू किनाहुं ना पाया”

“वे खासिया गाय कटावे, वादे जन्म गवाया”

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कबीर देश भर मैं बहत घूमे,कुछ दिन वह जगान्नाथ में भी रहे।।कबीर को दिल्ली के सुल्तान लोदी के

काल का माना जाता है।।कहा जाता है कि सिकंदर लोदी को भी कबीर की सिकायत की गई ,उस समय

के एक  जाने माने एक मौलाना ने ईर्षा और निंदा के आरोप में कबीर को सजाए मौत देने को कहा।।

बादशाह ने फरमान निकाला कबीर को दरबार में सुबह बुलाया गया पर वह शाम को दरबार मैं

उपस्थित हुए।

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KABIR WIKIPEDIA IN HINDI   –   KABIRJI  –  BIOGRAPHY OF KABIR DAS IN HINDI   –  KABIR DAS SHORT BIOGRAPHY IN HINDI   –  KABIR  KI JIVANI  –  INFORMATION ON KABIR DAS IN HINDI   –  HINDI POET KABIR  –       KABHIR DAS

काशी के चोरा मठ से प्रकाशित किताब “कबीर जीवन कथा” के मुताबिक कबीर दरबार में जाने के

लिए गले में तुलसी की माला पहनी,माथे पर चंदन लगाया सिर पर चंदन लगाया और पगड़ी पर मोर पंक

लगाया,जबकि ऐसा बेश कबीर कभी नहीं बनाते,कबीर के सामने दिल्ली के सुल्तान खड़े थे उनके

सामने कबीर निर्भय निडर हो कर खड़े थे।कबीर बादशाह के सवालों के जवाब देने लगे उनके जवाब से

खुश होकर उन्हें छोड़ दिया गया।

 

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कबीर की जिंदगी अब तक हमने जितना देखा उससे कुछ बाते बिल्कुल साफ है भारतवर्ष में को दबे

कुचले थे जो दलित थे उनके लिए आवाज़ उठाने वाले वह पहले इंसान थे। वह जाती धर्म को तोड़कर

समाज सुधार की बात आज से ६००साल पहले कर रहे थे।

कबीर का कहना है गरीब चाहे किसी भी धर्म का हो इस्वर प्रेम का वह बराबर अधिकारी है हकदार है

यह बात कबीर अपने सभी शिष्य को समझाई।कबीर ने धर्म के अंधविश्वास की जकड़न को चुनौती दी

।।न हिंदू न मुसलमान की घोषणा करने वाले संत कबीर पहले कवि थे जिन्होंने धर्म निरपक्ष समाज की

कल्पना की।

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उत्तरप्रदेश का संत कबीर नगर का एक कजबा है ,जहा पर मजार और समाधि एक साथ साथ है समाधि

भी कबीर की और मजार भी कबीर की। काशी से कबीर मघ हर कबीर के आए यह अपने आप में एक

बड़ी कहानी है,एक मत यह है कि कबीर अपने आखिरी दिनों में काजी कोतवाल पंडितो से परेशान हो

कर मग हर चले आए।

लोगो का मानना है कि बनारस में देह त्याग ने से मुक्ति मिलती है पर कबीर का कहना है कि मेरे किए

कर्म ही मुझे स्वर्ग या नरक लेके जाएगा।।मेरा कर्म ही अगर स्वर्ग मैं जाने लायक ना हो तो में कैसे जा

सकता हूं।।उन्होंने लोगो की मानता को अस्वीकार किया और मघ हर मैं चले आए ।।कबीर की मृत्यु को

लेकर कई सारे लोक कथा है कहा जाता है कबीर की जब मृत्यु हुई तब उनके शव की जगह सिर्फ फूल

मिले ।।

SAINT KABIR IN HINDI  – 

कबीर जी ने अपने वाणी मैं खुद कहा है,न मेरा जन्म हुआ है न मेरा कोई मात पिता है और न ही मेरी

कोई पत्नी है मुझे तो कमल के फूलों में जुलह दंपति ने पाया है जिस कारण से दुनिया मुझ पर हस्ती है।।

माना जाता है कबीर साहेब जब बालक रूप में थे तब उनका लालन पालन कुंवारी गाय के दूध से हुई थी।

KABIR KA JANAM   –  KABIR DAS DATE OF BIRTH  

एक बार कबीर का नामकरण करने के लिए काजी आए ,काजी धार्मिक पुस्तक कुरान के आधार पर

नामकरण करने लगे और जब काजी ने कुरान खोली तब समस्थ कुरान कबीर के नाम से भर गया।।तब

कबीर ने कहा कि इस कलयुग में मेरा नाम कबीर ही प्रचलित होगा।।कुछ दिनों का शिशु जब बोल उठा

उसकी मधुर वाणी सुनकर काजी वहां से भाग गए।।

५ बर्ष के उम्र में कबीर जी स्वामी १०४ वर्षीय रामानंद के शिष्य बने।।मान्यता अनुसार  कबीर जी ने खुद

रामानंद को अमर्लोक का मार्ग बताया और कबीर जी ने खुद रामानंद को अमार्लोक का दर्शन भी

करवाया।।

KABIR SANT   –   KABIR KI JIVANI IN HINDI 

कुछ लोगो के मान्यता अनुसार कबीर जी की पत्नी लोई थी ,उनका एक पुत्र भी था जिसका नाम कमाल

था और उनकी एक पुत्री भी थी जिसका नाम कमाली थी।पर कबीर जी के बाणी के अनुसार उनके कोई

पत्नी नहीं थी कबीर जी अपने दोहे मैं कहा करते थे

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मात पिता मेरे कुछ नाही

ना मेरे गृह दासी

जुलाहे का सूत आन कहाया

यह जगत करे मेरी हासि

SANT KABIR HINDI   –  INFORMATION ON SANT KABIR IN HINDI  –  HINDI POET   –  SANT KABIR BIOGRAPHY IN   –  HINDI  –    JIBAN PARICHAY   –  AUTOBIOGRAPHY OF KABIR DAS IN HINDI  –  KABEER K BIOGRAPHY   – KAVI PARICHAY IN HINDI  –  LIFE OF KABIR DAS IN HINDI  –   KHABIR  –  KABEER DAS BIOGRAPHY IN HINDI  

शांग्सारिक दृष्टि में कबीर जी पड़े लिखे नहीं थे,लेकिन कबीर जी का ज्ञान वेद और शास्त्र से भी आगे का

था,वह शास्त्र को न पड़ कर भी शास्त्र का हर भेद जानते थे तथा उसके आगे की जानकारी भी बताया

करते थे ।।कबीर जी जब बालक थे तब ही से उन्होंने हिन्दू मुसलमान और आदि धर्म और धर्मगुरु पर

कटाक्ष भरी बाणी तथा अपनामत प्रकाश किया करते थे।।

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JEEVAN PARICHAY OF KABIR DAS IN HINDI  –  INTRODUCTION OF KABIR DAS NHINDI  – AUTOBIOGRAPHY HINDI  –  KABIR DAS KA PARICHAY

वे ब्राह्मणों को कहा करते थे तुम दुनिया को मूर्ख बना रहे हो तुम्हारे साधना तुम्हारे शास्त्र से विपरीत है।।

और काजी को कहा करते थे तुम मौलाना अल्लाह का नाम लेकर बकरी, गाय  आदि को खाते हो और

फिर कहते हो तुमको बिस्त मिलेगा तुमको अल्लाह के बारे में जानकारी नहीं है जिस वजह से धर्मगुरु

कबीर जी के खिलाफ हो गए थे।।

धर्मगुरु सबको कहने लगे कबीर झूट बोलता है और कबीर को गलत प्रमाण करने लगे पर क्युकी धर्मा

गुरु ,कबीर द्वारा लगाए गए आरोप को सिद्ध नहीं कर पा रहे थे।।इसलिए कबीर को ही उल्टा दोषी

बनाकर धर्मगुरु, समाज के समक्ष प्रस्तुत करने लगे।।

कहा जाता है कि एकबार कबीर जी को मुसलमान सम्प्रदाय को कटाक्ष बाणी के माध्यम से नीचा

दिखाने के आरोप मैं राजा सिकंदर के समक्ष प्रस्तुत किया गया तभी राजा ने एक गाय का सिर धड़ से

अलग करके कबीर को कहा अगर तुम सच में परमात्मा हो तो इस गाय के अंदर फिर से प्राण संचालित

करके अपने परमात्मा होने का प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए आदेश दिया,तभी कबीर ने गाय का कटा

हुए सिर फिर से वापस गाय के शरीर में स्थापन करके प्राण संचालित करके अपने परमात्मा होने का

प्रमाण दिया जिसे देख राजा सिकंदर को उनके परमात्मा होने का आभास हुआ।।

एकबार दिल्ली के राजा सिकंदर को जलन का भयंकर रोग हो गया उसने हर एक प्रयास करके देखा

अपना जलन का रोग कम करने की परन्तु कुछ लाभ नहीं हुआ,तभी काशी नरेश ने दिल्ली के राजा

सिकंदर को परामर्श प्रदान किया को उनके जलन के रोग का एक मात्र इलाज कबीर जी के पास है ।।

आपका रोग निवारण कबीर जी के अतिरिक्त इस संसार में कोई भी नहीं कर सकता।।

सभी जगह से निराश राजा सिकंदर अंत में कबीर जी के पास उनके कुटिया मैं रोग निवारण के उद्देश्य

से प्रस्तुत हुए।।पर कबीर तब कुटिया मैं उपस्थित नहीं थे कबीर के गुरु स्वामी रामानंद तभी कुटिया मैं

थे,राजा सिकंदर मुसलमान होने के कारण रामानंद ने उनको अधिक मात्र मै उनका तिरस्कार किया

और तिरस्कार के कारण क्रोध में आकर राजा सिकंदर और काशी नरेश ने रामानंद की गला काट कर
हत्या कर दिया।।

उनकी हत्या के बाद कबीर जी का गुरु का रूप उनमें देख कर दोनों राजा को बहत पश्चाताप हुआ और

दोनों वहां से जाने लगे तभी रास्ते में उनको कबीर साहेब जी मिले ,कबीर साहेब जी को देख कर दोनों

नरेश ने उनको दंड वद प्रणाम किया और कबीर जी के आशीर्वाद से ही राजा सिकंदर लोधी के शरीर

का जलन उसी समय ठीक हो गया।।

  AUTOBIOGRAPHY OF KABIR DAS IN HINDI KABEER DAS BIOGRAPHY IN HINDI  

कबीर साहेब ने नरेश से उनके आने का कारण पूछा तभी नरेश ने अपने द्वारा हुए कबीर जी गुरु हत्या

की भूल की क्षमा याचना करने लगे तभी कबीर जी ने क्रोधित ना होकर मुस्कुराते हुए कहा कोई बात

नहीं और उन्हें क्षमा कर दिया और कबीर सहित नरेश कुटिया में जाकर गुरु स्वामी रामानंद को भी

जीवित कर दिया और फिर कबीर जी ने कहा जाती तो इंसान ने बनाई है राम अल्लाह ईश्वर तो एक ही है

संत जी,इन बातो को सुनकर रामानंद जी शर्मिंदा हुए तथा ऐसा फिर से न करने की प्रतिज्ञा की।।

कबीर जी द्वारा नरेश सिकंदर को ठीक करना तथा रामानंद को फिर से जीवन दान देने की वजह से

राजा सिकंदर कबीर जी को दिल्ली ले जा कर सभी के समक्ष प्रस्तुत किया और कहा कि कबीर जी

अल्लाह के ही रूप है और उनको सम्मान के सहित अपने है दिल्ली में रखा।। तभी कबीर जी की,

समाज मैं इतनी सम्मान और पूजनीय होने से दिल्ली के राजा के धर्म गुरु के अंदर ईर्षा ने जन्म लिया।।

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Kabir Das

कबीर को ५२ प्रकार के परिक्षयो देने के लिए मजबुर किया और कबीर जी हर एक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए

उनका कोई कुछ नहीं बिगड़ा पाया ।। कबीर जी चमत्कारी रूप को दखे तथा उनके चमत्कार को देख

कर उनके ६४लाख शिष्य बने थे।।उस समय कबीर जी हर एक बात डंके के चोट पर कहा करते थे

और इस वजह से हिन्दू और मुसलमान धर्म गुरु उनसे ईर्षा रखते थे।।

धर्म गुरु सोचते थे अगर सभी कबीर के पास चले गए तो हमको दान कैसे मिलेगा इसी कारण लोकलाज

में सभी धर्म गुरु का मकसद कबीर जी को खतम करना था कबीर जी को जनता के सामने हराना था।

लेकिन कबीर एक महान पुरुष थे इसीलिए ना ही कोई उन्हें मारने में सफल हुए और न ही कोई उन्हें

हराने में सफल हुए ,जब भी कबीर जी को मारने का या हराने का कोई भी प्रयास किया जाता कबीर

कुछ ऐसा करते जिससे लोगो मैं कबीर जी के लिए और भी सम्मान बड़ता और इसी वजह से ही उनके

६४लाख शिष्य बने ।।

कबीर जी लोक मान्य प्रथा को गलत प्रमाणित करने के लिए अपने अंतिम समय में वे मघ हर चले गए थे

।।लोक मान्यता थी कि अगर कोई काशी मैं अपना प्राण त्यागता है तो उसको स्वर्ग की प्राप्ति होती है

और जो मघ हर मैं अपना प्राण त्याग करता है उसको नरक की प्राप्ति होती है।।पर कबीर जी अनुसार

इंसान का कर्म ही उसको नरक या स्वर्ग ले जाता है वे इस अंधविश्वास को नहीं मानते थे इसीलिए वे

अपने अंतिम समय में मघ हर चले गए ।

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KABIR DAS WIKIPEDIA IN HINDI – Must Read!!

ऐसा माना जाता है कबीर जी ने जब अपना शरीर त्याग किया तब उनके शरीर के स्थान पर फूल मिले

।। कहा जाता है उन्हीं फूलों को हिंदू और मुसलमान ने समान मात्रा में दोनों जाती ने अपने पास रख

लिया और हिन्दू इन फूलों से कबीर की समाधि का स्थापन किया और मुसलमानों ने इन्हीं फूलों से मघर

बना लिया ।।और इसी तरह एक महान कबीर साहेब का इतिहास पुस्तक,ज्ञानी पुरुष, कवि ,लेखक

,जनश्रुति मैं मिलकर रह गया।।

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