Best Ever Facts of Mahadevi Verma : Very Few Peoples know – 2021 Latest updates on Amrita Pritam

 

Mahadevi verma stories in hindi- हिंदी साहित्य की एक अद्भुत प्रतिभा ममतामई महादेवी वर्मा वह ऐसी ही थी,वह ना ही सिर्फ अपनी अधिकार के लिए लड़ना जानती थी बल्कि उन्होंने देश के महिलाओं को अपने अधिकार बताए और महिलाओं को अपने अधिकार के लिए लड़ना सीखाया।।महादेवी जिनको आधुनिक हिंदी की मीरा के नाम से जाना जाता है।। मन की पीड़ा और करुणा अगर किसिकी कृति के साथ एकाकार हो जाए तो वह पूंजीभूत होकर मीरा हों जाती है,वह अमृता प्रीतम हो जाती है वह महादेवी वर्मा हो जाती है।।

mahadevi verma

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BIOGRAPHY OF MAHADEVI VARMA

महादेवी जी को होली बहत प्रिय थी जीवन भर उन्होंने इस रंगों के उत्सव को बहत चाह से
मनाया करती थी। घर पर खूब लोग आते और महादेवीजी सबको रंग का टीका लगाती और सबको
आशीर्वाद देती और स्नेह में भिगो देती।

26 मार्च 1907 वह रंगों का तियोहर होली का दिन था जब उत्तरप्रदेश के फरुखाबाद के एक परिवार

में 200साल की प्रतीक्षा के बाद एक लड़की पैदा हुई।

7पीडियो के बाद से लड़की के जन्म से उनके बाबा बाके-बिहारी खुसी से झूम उठे,और बच्ची को घर को देवी महादेवी बुलाने लगे।

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पिता गोविंद प्रसाद वर्मा गोविंदपुर के एक कॉलेज में प्राध्यापक थे और माता इमरणी धर्मनिस्ट

गृहिणी थी।घर में पूजापाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल सदह बना रहता था।

MAHADEVI VARMA की सादी 7 साल के छोटे उमर में 1914 में ड्र.स्वरूप नारायण वर्मा से

हुई मगर वह अपने मातापिता के साथ इलाहाबाद में ही रही जब तक उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की,

17 साल की उम्र में वह अपने पति के पास गई पर संभवत गृहस्ता जीवन उनके लिए था है नहीं

उन्होंने गृहस्थ आश्रम त्याग किया और उन्होंने सन्यासी जीवन जीने का निश्चय किया और जीवनभर

इस निश्चय को निभाया भी।

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बिड़बना देखिए होली के दिन जन्मी महादेवीजी ने जीवन में एक ही रंग अपनाया सारी रंगों का

आदिम पृष्टाभूमि का रंग पीड़ा का रंग सफेद रंग।।

उनके कविताओं में भी एक तरह का अकेलापन नजर आता है,  एक एकाकी पीड़ा झिलमिलाती रहती है,

“पंथ होने दो अपरिचित प्राण रेहेने दो अकेला”

“हाश का मधुदुथ भेजो”

“रोष की भ्रू-भंगिमा पतझार को बाहे सहेजो”

“ले मिलेगा उर अचंचल”

“बेदना-जल – स्वपन – सतदल”

“जान लो वह मिलन एकाकी”

” बिरह में है दूकेला”

“पंत होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला”

MAHADEVI VERMA KI KAHANIYA

न सिर्फ साहित्य बल्कि विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि सफेद रंग में सभी रंग समाए

हुए होते है।ऐसे ही महादेवी के भी कई सारे रंग थे “पीड़ा को गीत कर देने वाली मीरा सी महादेवी”

“स्त्री शिक्षा की मुहिम चलाने वाली क्रांतिकारी महादेवी”

“पशु पक्सियो के बीच खेलती और उनमें अपनी निजता का परिवार रचती सकुंतला सी महादेवी

महादेवी हिंदी के उन गिने चुने लेखकों में से एक है जिन्होंने कबिता के साथ साथ चित्रांकन में भी

अपनी सर्जना की अभीबेक्ती दी।। “यामा” और दूसरी कई पुस्तकों में उनके खुदके उकेरे हुए चित्र

है। इन चित्रों को देख कर आसानी से समझा जा सकता है की कला का यह क्षेत्र भी उनके लिए सहज ही

था

निज जीवन में भी महादेवी महात्मा बुद्घा से बहत प्रभावित रही। बेक्तित्य ही नहीं क्रतित्य की भी बात

करे तो महादेवी की कविताओं में महात्मा बुद्ध के सूत्र जीवन दुख का मूल है,सदः प्रतिबिम्बित सा

होता दिखता है।।

एकबार तो महादेवी पूर्णकालिक भिक्सुनी बनने का प्रण लेने एक संत के पास चली भी गई थी,लेकिन

सत्य को निरबरण अनुभव करने वाली महादेवी को वहां कुछ ऐसा अनुभव हुआ कि उन्होंने अनन्य मार्ग

धुंडना सुरु कर दिया।।

उनके जीवन में और उनके कविताओं में महात्मा गांधी, महात्मा बुद्ध ,नेताजी सुभाष चन्द्र, का

प्रभाव लगातार बना रहा।।

“जो तुम आ जाते एकबार “

“हस उठते पल में अरद नयन”

“धूल जाता होंठ से विषाद”

“छा जाता जीवन में बसंत”

“लूट जाता चिर संचित विराग”

“आंखे देती देखती बार बार”

“जो तुम आ जाते एकबार”

Information about mahadevi verma in hindi-mahadevi verma wikipedia in hindi

कुछ अपनी और कुछ अपनी आसपास की पीड़ा से बैचेन महादेवी कुछ सार्थक करना चाहती

थी,ऐसे में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सलाह मिली राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रतीक पुरुष वन चुके सत्य के

उस समय के परियावाची पुज्ज्य महात्मा गांधीजी से।।

 

इन्होंने महादेवीजी को सलाह दिया की“कोई जरूरी तो नहीं कि सभी मेरी तरह सड़क पर उतर

कर आंदोलन करे और तभी देश और समाज का काम करे,आप तो ऐसे भी देश सेवा कर सकती

है,आप अपनी साहित्य से समाज को ऊपर उठाएं ,मूल्यवान बनाए।।

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गांधीजी का सिर्फ एक वाक्य महादेवीजी के लिए जैसे जीवन सूत्र हो गया।महादेवीजी ने अपना पूरा

जीवन साहित्य और साहित्य के माध्यम से  समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया ,बिना अपने लिए

कुछ मांगे बिना अपने लिए कुछ चाहें।।

Maha devi varma -biography of madevi verma in hindi

प्रिय तेरे नभ-मंदिर के

मणि दीपक बुझ बुझ जाते

जिनका कण कण विदूत्त है

मैं ऐसे प्राण जलाऊ

तुम सो जाओ मैं गाऊ

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MAHADEVI VERMA STORIES ON ANIMELS IN HINDI
mera parivar by mahadevi verma-summary of mera parivar by mahadevi verma in hindi_
पशु पक्षिओ से उनका प्यार इतना गहरा था कि घर में कई तरह की जानवर आश्रय पाते थे,उनके
नाम रखे जाते लाड दुलाढ़ होता,इन पशु पक्षिओ को पूरे घर में घूमने की आज़ादी होती,और सभी पालतू
पशु पक्षिओको निजी सदस्य की तरह रखा जाता।।

महादेवी जी के कई रचनाओं के पात्र इन्हीं कुछ साथियों से बनी जैसे की “सोना हिरनी” उनकी पालतू

हिरनी के ऊपर लिखी गई,“नीलू” की वह लोकप्रिय वह कथा उनके पालतू खरगोश के ऊपर

लिखी गई,और “गोरा” की वह मर्मंतीक कहानी जो उनके करुणामई  गाय पर आधारित थी।।

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महादेवी ने जीवन में जिससे भी प्रेम किया उनसे उनका साथ जीवन भर का रहा चाहें वह उनके अंतर में

रहने वाली पीड़ा हो या उनके द्वारा लालन पालन किया गया पशु पक्षी क्यों ना हो,देश के प्रति अपने योग

बोध से हो, पर्वत राज हिमालय से हो, बचपन की सहेली सुभद्रा चौहान ही क्यों ना हो सबसे उनका प्रेम

और साथ जीवन भर का था।।

Mahadevi verma stories –
mahadevi को अपने जीवन में जैसे सुभद्रा चौहान जैसे सहेली मिली वैसे ही बहत दिग्गज कभी बंधु भी
मिले जिनमें सुमित्रा नंदन पंथ,सूर्यकांत त्रिपाठी निराला सामिल थे,जिनसे महादेवी जीवनभर जुड़ी
रही।उन्हें,जो भी अच्छा लगा उनके साथ वह जीवन भर जुड़ी रही।
mahadevi verma ki rachnaye in hindi

बीन भी हूं मैं तुम्हारी और रागिनी भी

नींद थी मेरी अचल, निष्पंद कण कण में

प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पंदन में

प्रलय में मेरा पता पद चिन्ह जीवन में

 शाप हूं जो बन गया वरदान बंधन में

कुल भी हूं कुल हीन प्रबहिनी भी हूं

बीन भी ही तुम्हारी रागिनी भी हूं।।

आग हूं जिससे दुलकते बिंदु हिमजल के

शून्य हूं जिसके बिछे है पाबड़े पल के

पलक हूं जो पला है कठिंन प्रस्तर में

हूं वही प्रतिबिंब जो आधार के उर में

निल घन भी हूं सूनहली दामिनी हूं

बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं

stories of Mahadevi verma in hindi-mahadevi verma information in hindi

जब इलाहबाद में थी तब उनकी नेहरू परिवार से अच्छी दोस्ती हो गई थी,खुद जवाहरलाल नेहरू भी

बहत मानते थे उन्हें,और जवाहरलाल नेहरू के दोनों बहनों के साथ भी महादेवीजी की बहत अच्छी मित्रता थी।।

श्रीमती इंदिरा गांधी जी भी महादेवीजी को बहत मानती थी इंदिरा जी ने महादेवीजी को सर्वप्रथम रबीन्द्रनाथ टैगोर के विश्वविद्यालय मैं देखा था और तभी से इंदिरा जी के में में महादेवी जी के लिए अपार आदर था||

mahadevi verma stories in hindi

महादेवीजी अपने जीवन में कई प्रभावशाली परिवार से मिली और इसके अलबा वह भारत के स्वाधीनता

आंदोलन के समाए वह क्रांतिकारियों को भी साथ रही ,उन्होंने क्रांतिकारियों को अपने विद्यापीठ मैं

आश्रय दिया उनका समर्थन किया ।।

महादेवीजी को प्रकृति बहत प्रिय था वह मीरा जैसी थी समाज के हर बंधन से मुक्त हो कर एकाकी रहने

में ज्यादा रुचि थी।।उनके लिए हिमायल बहत प्रिय था।।उन्होंने हिमायल के ऊपर भी एक मधुर

कविता लिखी hindi gadya जो सभी के मन को छू जाती है ।।

mahadevi varma ki kahaniya-information about mahadevi verma

धीरे धीरे उतर क्षीतिज से

आ बसंत रजनी

तारक मय नब  वेणी बंधन

शीश फूल कर शीश का नृ तन

रश्मि वलय सिथ घन अवगुणठन

मुक्ताहाल अभिराम बिछा दें

चितवन से अपनी

पुलकती आ बसंत रजनी

धीरे धीरे उतर क्षितिज से

आ वसंत रजनी।।

मर्मर की सुमधुर नूपुर ध्वनि

अली गुंजित कमल की किकिनी

भर पद गति में अलस तरंगिनी

तरल रजत की धार बहा दे

मृदु स्मृति से सजनी

बिहंगसती आ बसंत रजनी


mahadevi verma ने अपने साहत्तिक जीवन में हर तरह के चरम छुए 1935 में प्रसिद्ध क्रांतिकारी पत्रिका

चांद की संपदिका रही चांद के बहत प्रसिद्ध हुए और

ऐतिहासिक अंग बिदुर्शी अंग की संकल्पना और संपादन

उन्होंने हि किया।।

 

साहित्य के प्रति उन्होंने अनवरत साधना करने और समाज के  साथ साथ साहित्य में महिलाओं की

भागीदारी की लगातार वकालत करती रही||

1933 में पहला कवियत्री सम्मलेन करा के उन्होंने देश में अखिल भारतीय कवियत्री सम्मेलन की

नीव रखी।।

साहित्यकारों की कल्याण के लिए उन्होंने साहित्य संसद जैसी एक संस्था की  स्थापना की।।

जहा साहित्यकार सुरक्षित रूप से अपना जीवन बेईयतित कर सके।।

हालाकि आगे चल कर साहित्यकारों की परस्पर अकारण ईर्षा और स्पर्धा का शिकार होने के कारण

साहित्य संसद ज्यादा समय तक नहीं चल सका।। लेकिन maha devi jiने अपनी कोशिश जारी रखी।।

महादेवीजी प्रयाग महा विद्यापीठ की पहले प्रिंसिपल और उसके बाद चांसलर बनी।। महादेवी

को 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार और 1988 में पद्मविभूषण से नवाजा गया।।

महादेवी वर्मा- कविगुरु रबीन्द्रनाथ

mahadevi verma stories in hindi neelkanth  महादेवी वर्मा  इन सबके बीच उनका प्रकृति के

प्रति प्रकृतिप्रेम याथाबद  बना रहा।। महादेवी पर कबिगुरू रबीन्द्रनाथ टैगोर का बहत प्रभाव

पड़ा।।कविगुरु रबीन्द्रनाथ टैगोर को एकबार एक विदेशी कबी ने पूछा आप इतना मधुर गीत

कैसे लिख लेते है तब उत्तर मैं कविगुरु रबीन्द्रनाथ ने उत्तर दिया कि मेरे अंदर एक बिरहिता स्त्री

अपनी पीड़ा लिए रहती है जो महादेवी है में उस स्त्री के रू धन को सुनकर गीत गा देता हूं।।

MAHADEVI VERMA INFORMATION IN HINDI

संभवतः mahadeviverma का भी ऐसा कुछ विचार रहा होगा जब उन्होंने प्रकृति को स्त्री के रूप में

सब्दाकृती दी होगी।।प्रकृति को अपने मानव रूप में अनुभव करके उसका रहस्यवादी चित्रण महादेवी

से पहले बहत कम दखा गया है।।
about mahadevi verma in hindi-bharma

रूपसी तेरा घन केश पाश

शामल शामल कोमल कोमल

लहराता सुरभित केश पाश

नबगंगा की रजत धार में

धो आयी क्या इन्हे रात

इन स्निग्गध लट से छा दे तन

पुलकित अंगो से भर विशाल

झुक साशिस्मत शीतल चुम्बन से

अंकित कर इसका मृदुल भाल

दुलरा देना बेहला देना

यह तेरा शिशु जग है उदास

रूपसी तेरा घन केश पाश।।


 MAHA DEVI VERMA  11सितंबर 1987 को 80साल के उम्र में अपना शरीर त्याग किया।।

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