Moral Stories In Hindi :20 Moral Stories That Millions Of People Searching in 2021!!

Moral Stories In Hindi –  स्वागत है आपका हमारे बोलग मैं || क्या आप हिंदी मैं मोरल स्टोरीज को खोज रहे है?? क्या आप Moral Stories In Hindi की एक अच्छी कलेक्शन न मिलने के वजह से परेशान है?? तोह हमारा यह ब्लॉग आपके सभी परेशानीयों का एक मात्र उपाय है ||

इस ब्लॉग पोस्ट मैं हमने आपके के लिए कुछ ऐसी कहानियाँ लिखी है जिसे पड़कर आपको हिंदी भाषा के एक नए रूप के बारे मैं पता चलेगा,इसी के साथ आपको इन् सभी  कहानी से एक अलग ही प्रकार का  सहायता मिलेगा जिससे आप भी कहानी को लिख पायेंगे ||

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Moral Stories In Hindi : 1.01

  • Moral stories in hindi – हिम्मती मिर्ज़ा

एक जंगल में मिर्जा नाम का एक लड़का अपने दोस्तो के साथ रहता था।। मिर्जा एक इंसानी बच्चा था जो भेड़ियों के साथ रहकर जंगल मै बड़ा हुआ।।

उसके दो दोस्त थे एक का नाम बल्लू था और दूसरे का नाम वगीरा था जो एक बाघ था।।एक दिन मिर्जा अपने भेड़िए दोस्तों के साथ जंगल में खेल रहा था तभी एक भेड़िया दोस्त जिसका नाम बाला था ।।

उसने मिर्जा को अपने साहस का प्रमाण देने के लिए जंगल का राजा शेर खान के मुछ के वाल तोड़कर लाने को कहा।।और मिर्ज़ा बिना कुछ सोचे शेरखान का बाल तोड़ने के लिए राजी हो गया और शेरखान की गुफा के तरफ जाने लगा

तभी मिर्ज़ा धीरे धीरे शेरखान के करीब जाने लगा और जैसे ही मिर्ज़ा उसके पास गया तभी शेरखान ने उसपर हमला कर दिया लेकिन मिर्ज़ा चालाकी से बच निकला ||

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और तभी बल्लू और बगिरा वहां पे आ गएबाद में पता चलता है शेरखान मिर्ज़ा को अपना शिकार बनाने के लिए यह योजना बनाता है जो था “शेरखान के मुंह से मूछ तोड़कर लाना” और मिर्ज़ा जिसमें फस गया था ।।

लेकिन मिर्ज़ा ने हार नहीं मानी और वह बचने की प्रयास जारी रखता गया तभी एक पतली सी पेड़ के बीच से निकल ना थामिर्ज़ा के पतली शरीर के वजह से उस पतली पेड़ को कूद कर पार कर लिया

लेकिन शेरखान उस पतली पेड़ को कूद कर पार नहीं कर पायाशेरखान का सर दीवार मैं फस गया और तभी मिर्ज़ा ने चालाकी से शेरखान के मुंह से मूछ तोड़ लिया।।और इसी तरह मिर्ज़ा ने अपने चालाकी और साहस का परिचय दिया।।

Moral Of The Story – अगर मन मन मैं किसी भी काम अथवा परीक्षा पार करने का बिस्वास और साहस हो तो किसी भी प्रकार का कठिन परिस्थिति इंसान को पीछे नहीं ले जा सकता।।

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Moral Stories In Hindi – 1.02

  • Moral stories in hindi – चालाकी और ज्ञान

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एक दिन मौगली और हीरा जंगल में एक नदी के सामने खेल रहे थे तभी अचानक मॉग्ली पैर फिसल कर नदी में घिर गया और वह नदी की तेज धारा की वजह से हीरा से तोड़ा दूर चला गया

हीरा अकेला हो गया उसको अकेला देखकर भिमा नाम का एक बाग जिसका नजर हीरा पर पड़ा और वह और उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे दौड़ने लगा

तभी माउग्ली भाग कर आया और अपने दोस्त को बचाने की कोशिश करने लगा |।हीरा बुरी तरह से भीमा का शिकार बनाने ही वाला था

तभी माउगली को एक पेड़ दिखा जिसमें एक तरह का फल था जिसे खाने से आंखों में जलन होता है ।।माउग्ली ने उसी फल को तोड़कर भीमा की और फेक दिया

और तभी भीमा बिना समझे उस फल को खाने लगा और खाने के बाद उसके आखो में जलन शुरू हो गया और उसने हीरा को छोड़ दिया ।। और तभी हीरा और माउग्ली वहा से भाग गए।।

Moral of the story – चालाकी और ज्ञान मुसीबत के समय काम आने वाले दो एहम  दोस्त है ||


Moral stories in hindi for class 4

  • Moral Stories In Hindiईमानदारी का फल

रामगढ़ नामक एक गाँव में लखन सिंह नाम का एक पेंटर रहता था वह बहत ही गरीब था और लोगो के घर ,और दुकान के चिजो को रंगने का काम करता था।।

उसका सपना था कि वह अपनी मेहनत से बहत सारा पैसा कमाई करके अपने लिए एक खूबसूरत सा घर खरीदे

लेकिन उसकी गरीबी की वजह से वह सारा दिन काम करके सिर्फ एक वक्त का खाना ही जुटा पाता था।।

एक दिन गाँव के एक धनी जमींदार ने उसको अपनी नाव दिया रंग करने के लिए और लखन सिंह को कहा कि शाम तक वह नाव उसको रंग करके देने के लिए

लखन सिंह यह काम मिलने की वजह से बहत खुश हो गया और जमींदार ने उसका काम खतम करने पर 2000 रूपए देने का वादा भी किया ।।

लखन सिंह एकाग्रता के साथ नाव को रंग देने लगा और अचानक देखता है कि नाव के अंदर उसको एक छेद है।।

तब वह सोचता है अगर मैंने ऐसे ही नाव को रंग दिया तो छेद की वजह से नाव डूब जाएगी और मेरा पूरा मेहनत बेकार चला जाएगा ।।


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लखन सिंह ने छेद को ठीक करना शुरू किया और नाव की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा

और उसके बाद उसने फिर से नाव को रंग देने में लग गया कुछ समय के बाद नाव पूरी तरह से रंगने के बाद वह नाव को जमींदार को लौटाने जाता है

वहा पे जाने के बाद जमींदार लखन सिंह का काम देख कर बहत खुश होता है और लखन सिंह को अपने पैसे लेने के लिए कल सुबह आने के लिए बोलता है।।

सुबह होने के बाद जमींदार का परिवार किसी कारण शहर जाने के लिए उसी नाव की सहायता लेते है।।

परिवार के सदस्य शहर जाने के बाद जमींदार का एक नौकर आता है और जमींदार के परिवार को अनुपस्थित देख कर आश्चर्यचकित हो जाता है

और अपने मालिक को नाव छेद होने की सूचना देताजमींदार पहले पता नहीं थी।।और यह बात सुनकर जमींदार चिंतित हो जाता है।।


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कुछ देर बाद जमींदार के परिवार वाले शहर से भ्रमण समाप्त करके अपने घर लौटता देख जमींदार खुशी से पागल हो जाता है

उसके परिवार का सकुशल लौटने का सम्पूर्ण श्रेय लखन सिंह को देता है जो ना ही सिर्फ नाव रंग करता इसके अलावा वह नाव की सुरक्षा का भी सम्पूर्ण ध्यान रखता है

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जिससे जमींदार बहत खुश होता है और लखन सिंह को 2000 रुपए के बदले 5000 रुपए देता है।।

लखन सिंह जमींदार को परिश्रमिक ज्यादा देने का कारण पूछता है और जमींदार उत्तर में कहता है

“यह तुम्हारे ईमानदारी और एकाग्रता से काम करने का पुरस्कार है ”

“आज तुम्हारे इस ईमानदारी की वजह से मेरा परिवार सुरक्षित है ”

लखन सिंह अपने लगन और ईमानदारी से काम करने की वजह से जमींदार ने उसको और भी बहत सारी जगह पर काम दिलाया

और एक दिन लखन सिंह अपने लिए एक घर खरीद ने में सफल हुए और खुशी से अपनी ज़िन्दगी बिताने लगा।।

Moral Of The Story- ईमानदारी और लगन से किया गया हर काम जीवन में तरक्की और खुशहाली को आने का निमंत्रण देती है।।


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  • कबीर और भिकारी – Moral Stories In Hindi For Kids

रामपुर नाम के एक गांव में कबीर नाम का मचवरा रहता था

वह बहत दरिया दिल इंसान था जो हमेशा लोगो की मदद करता था और गरीब लोगो के प्रति उसके दिल में बहत प्रेम था ।।

एक दिन वह बाज़ार मै मछलियां बेच कर अपने घर की और लोट रहा था तभी उसको सुलेमान नाम का एक भिकारी मिला जो बहत गरीब था और कई दिनों से भूका था।।

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भिकारी की हालत देख कर उसे बहत दुख हुआ और उस भिकारी के लिए कबीर के मन में सहायता कि भावना उत्पन्न हुआ और उस भिकारी को कुछ पैसे दे कर उसकी मदद की ।।

भिकारी उसके बाद से प्रतिदिन कबीर का इंतजार करता और कबीर प्रतिदिन उसको कुछ पैसे देकर जाता और इसी तरह चलता रहा ।।

एक दिन कबीर को लगा इस तरह भिखारी की मदद करने से अच्छा है कि उसे एक बड़ी मदद किया जाए ताकि उसे कभी भिक न मांगना पड़े।।


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कबीर ने भिखारी को कहा आज मैं तुम्हें पैसे नहीं दूंगा आज मैं तुम्हें कुछ ऐसा देने वाला हूं जिससे तुम्हे कभी भी भिक मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी

भिखारी कबीर की बाते सुनकर उत्साहित होकर कबीर के साथ नदी के पास चलने लगा और तभी कबीर ने कहा कि तुमको में को चीज देने वाला हूं उसके लिए तुमको मेरी मदद करने पड़ेगी

सुलेमान भिखारी ,कबीर की बात सुनकर राजी हो गया और उसकी मदद करने के लिए प्रस्तुत हो गया।।


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कबीर ने कहा तुम्हे मेरे लिए नदी से मछली पकड़कर देना पड़ेगा और भिखारी ने तभी उत्तर दिया कि उससे मछली पकड़ना नहीं आता ।।

कबीर ने उससे कहा मै तुम्हे प्रशिक्षित करूंगा, तुम मुझे देखो मैं किस प्रकार मछली को पकड़ता हूं तभी कबीर ने नदी जाल फेकर उसे दिखाया और भिखारी को भी समान रूप से जाल फेक ने लिए कहा।।


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जाल फेकना देख कर भिखारी के अंदर भी उत्साह का सृजन हुआ और भिखारी भी जाल फेकने का प्रयत्न करने लगा लेकिन जाल फेकना सीखने के बाद भी भिखारी मछली पकड़ ने में असफल रहा ।।

असफल होकर भिखारी कबीर से कहता है “इससे अच्छा आप मुझे पैसे ही दे देते” तभी कबीर ने कहा मछली पकड़ने के लिए धीरज का होना बहत जरूरी है।।

सुलेमान ने कबीर की बाते सुनकर धीरज और एकाग्रता के साथ फिर से मछली पकड़ने का प्रयास शुरू किया


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कुछ क्षण प्रतीक्षा करने के बाद सुलेमान को सफलता मिलने लगी और उसने कुछ ही पल में कबीर के लिए बहत सारी मछलियां पकड़ लिया

मछली पकड़ ने के बाद भिखारी ने कहा आप मुझे क्या बड़ा उपहार देने वाले थे आपके कहने के मुताबिक मैंने आपकी मदद की अभी आप मेरी मदद करे ।।

कबीर ने कहा ”देखो सुलेमान तुमने अपनी मदद खुद की है”

आज मेंने तुम्हे मछली पकड़ने का जो प्रशिक्षण दिया उस की वजह से तुम्हे अब से कभी भी जीवन में भीक मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।।

भिखारी कबीर की बाते सुनकर बहत खुश हुआ और कहा मै भी आज से खूब मेहनत करूंगा और सफल बनूंगा ।।

Moral Of The Story – मेहनत से इंसान किसी भी कठिन कार्य को कर सकता है और सफल बन सकता है सिर्फ धीरज के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।।


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  • Moral Stories In Hindi For Class 10  – लालच बुरी बाला है

एक गांव में राजू नाम का एक किसान रहता था वह बहत ही गरीब था उसके पास अपने परिवार को भरण पोषण के एक मात्र साधन था खेती करना ।।

लीला नाम की एक गाय थी राजू खेत में फसल लगता और उसकी सहायता से खेत को जोतता

और फसल को बेचकर राजू अपना परिवार का पेट पालता था।।

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राजू अपने गरीब होने पर उसका किसी भी प्रकार का दुख नहीं था वह अपने पास जितना था उसी में बहत खुश रहा करता था।

उसी गांव मै भीमा और रामू नाम के दो भाई रहते थे जिनके पास कई गाय थी और वह धन और संपत्ति के तुलना में राजू से बहत ज्यादा प्रभाव शाली थे ।।

भीमा और रामू इतने धन और समृद्धि के अधिपति होने के बाद भी वे खुश नहीं थे और दोनों राजू के खुशहाल जीवन को देख कर बहत ही नाराज रहा करते थे ।।


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राजू के पास एक गाय होने के बाद भी राजू बहत खुश था और भीमा रामू दोनों के पास कई गाय होने के बाद भी वे दोनों राजू ईर्ष्या करते ।।

फिर दोनों भाई ने राजू के उस गाय को खरीद ने का सोचा लेकिन राजू लीला को बेचने से इंकार कर दिया।।

जिसकी वजह से दोनों भाई और भी गुस्से में आ गए और उन्होंने रात को खेत मै जाकर राजू की पूरी फसल को जला दिया।।


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सुबह उठकर खेत को देख कर राजू बहत दुखी हो गया और उसने सोचा अगर में खेती नहीं कर पाया तो लीला को खाना भी दे पाएगा

और बिना खाना खाए लीला बीमार पड़ सकती है और इसी लिए राजू ने लीला को बाज़ार में ने बेच देना ही अच्छा होगा सोचा।।

लीला को बेचने के लिए राजू चल पड़ा और रास्ता बहत दूर था इसलिए राजू ने कुछ चांदी के सिक्के अपने पास रख लिया।।

राजू ने सोचा बाज़ार बहत दूर है और अगर रास्ते मैं किसी चांदी के सिक्के चुरा लिया तो और बड़ी मुसीबत हो जाएगी इसीलिए राजू ने चांदी के सिक्के लीला के गले के नीचे एक घंटी के अंदर डाल दिया।।

कुछ देर चलने के बाद राजू ने तोड़ा आराम करने का सोचा और एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया और लीला को एक दुकान के सामने बांध दिया


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लीला अचानक से अपने जगह से तोड़ा हिलने की वजह से घंटी में बंधे हुए चांदी के सिक्के गिरने लगे और यह घटना होते हुए दुकान के लाला ने देख लिया।।

लाला को लगा हो सकता है यह गाय चमत्कारी है और यह बात गाय के मालिक को पता नहीं और गाय को खरीद ने का निश्चय किया

राजू को लाला ने गाय की कीमत 2000 चांदी के सिक्के दिए जो गाय की कीमत से बहत ज्यादा था

राजू खुशी खुशी चांदी के सिक्के लेकर घर आ गया।।

राजू को इतना खुश और बहत सारे चांदी के सिक्को के साथ देखकर रामू और भीमा उलझन में पड़ गए और उससे इतनी सारी चांदी के सिक्के कहा से मिले पूछने लगे

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राजू ने लाला की बात कही और यह भी कहा कि इन सिक्को से वह बहत सारी गाय खरीदकर उनसे नई खेती शुरू करेगा और सभी गए का ध्यान भी रख पाएगा

यह बात सुनकर रामू और भीमा बहत ज्यादा पछताने लगे उन्होंने सोचा अगर वह गाय उनके पास होती तो आज वे और भी ज्यादा धनी होते,

राजू से दोनों भाई बहत ईर्षा करते थे और इसके बाद से और भी ईर्षा करने लगे पर इसका कोई असर राजू पर नहीं पड़ा

राजू 2000 चांदी के सिक्कों से बहत सारी गाय खरीद कर खेती करने लगा और एक दिन राजू भी रामू और भीमा की तरह एक सफल इंसान बन गया जिसका राजू को तोड़ा सा भी घमंड नहीं था।।

Moral Of The Story

घमंड और ईर्षा दोनों ही एक इंसान को बुरा बनने पर मजबुर करता है।।
जीवन मै सबकी मदद और निस्यार्थ मनोभाव तथा कर्म से ही सफल बना जा सकता है।।


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  • एक बुद्धिमान महिला – Moral Stories In Hindi For Class 6 With Images

रामपुर नाम के एक गाँव मै गौरी नाम कि एक औरत अपने पति भीमा के साथ रहती थी भीमा बहत ही आलसी इंसान था ।।

गौरी सारा दिन खेत मैं काम करती और भीमा पूरा दिन घर में बैठ कर आराम करता रहता था

गौरी एक खेत में फसल लगाने के लिए मिट्टी खोद रही थी और भगवान को अपने पति की आलास दूर करने के लिए प्रार्थना कर रही थी।।

गौरी के खेत कुछ दूर पर एक मंदिर था माना जाता है यह मंदिर बहत ही पुराना और समृद्धशाली था, यह बात बिरजू नामक एक चोर के कानों में पड़ गई ।।


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बिरजू उस मंदिर से सोना – चांदी – रुपए चोरी करने की योजना बनाने लगा।उसने देखा मंदिर के ठीक सामने एक खेत है ,जो खेत असल में गौरी का था।।

Note – अगर आपको हमारे ब्लॉग moral stories अछा लगा रहा है तोह कृपया हमें बताएं ।।

बिरजू चोर ने योजना बनाई की वह मंदिर का सोना और चांदी चुराकर खेत के रास्ते से भाग जाएगा और किसीको शक भी नहीं होगा।।

और इसी योजना मैं सफल होने के लिए गौरी का खेत उसको खरीदना बहत जरूरी था।।

बिरजू जानता था मंदिर से भागने का सिर्फ एक ही रास्ता है और जो खेत से होकर जाता है।।

बिरजू चोर गौरी के पास जाता है और गौरी को खेत में मिट्टी खोदते हुए देखता है।।

बिरजू गौरी के सामने खेत को 2000 चांदी के सिक्के देकर खरीद ने का प्रस्ताव रखता है जो खेत के असली कीमत से कई गुना ज्यादा था।।


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जिस वजह से गौरी को संदेह होता है और गौरी बिरजू को मंदिर की और लालाच भरी नजर से दखने की वजह से गौरी समझ जाती है कि यह कोई चोर हो सकता है।।

गौरी उसको अपने योजना मै फसाने के लिए कहती है “में अपना खेत नहीं बेच सकती क्युकी इस खेत मैं मेरे पूर्वजों ने खजाना छुपकर रखा है”

खजाने का नाम सुनकर बिरजू की लालच और बड़ जाता है और उसका चोरी करने का ध्यान मंदिर से हट कर गौरी के खेत के ऊपर आ जाता है।।

गौरी का पति आलसी होने के कारण गौरी को खेत को खोदकर मिट्टी मै फसल लगाने मैं बहत तकलीफ हो रही थी और बहत ज्यादा मेहनत करना पड़ रहा था।।

गौरी के योजना के अनुसार अगर चोर उसकी खजाने कि बाद पर बिस्वास कर लिया तो उसका काम बन जाएगा।।

और ऐसा ही हुआ रात को बिरजू खजाने की लालच मैं खेत मैं जाकर खेत की मिट्टी को खोदते लगा।।


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पूरी रात मिट्टी खोदते के बाद उसके हाथ कुछ नहीं लगा और असफल होकर बिरजू वहा से चला गया।।

सुबह जब गौरी खेत मैं जाती है खेत को पूरा खोद कर रखा हुआ देख कर बहत खुश होती है।।

गौरी खेत पर फसल लगाती और कुछ महीने के बाद उसे खेत से बहत आमदनी हुई जिससे वह अपने लिए बहत सारी गहना और अपनी मनपसंद की चीज खरीद लेती है।।

एक दिन गौरी को बिरजू बाज़ार मै देखता है । गौरी अपनी मेहनत के पैसों से खरीदे एक सोने की माला पहने हुए थी जिसे देखकर बिरजू को लगा गौरी को वह खजाना मिल गया होगा

गौरी को देखकर उसने सोचा खेत में मिट्टी खोद ने का मेहनत मेरा लगा और गौरी जिसका फायदा ले रही है और तभी बिरजू ने गौरी के घर में चोरी करने की योजना बनाई।।

रात को बिरजू अजनबी का रूप लेकर गौरी के घर में जाता है और गौरी के पति को एक रात रहने के लिए अनोरोध करता है


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बिरजू अपने आपको एक दूसरे गांव से आया एक मचवारा बताता है और रात होने के कारण कोई रहने कि जगह न मिलने का असुविधा दर्शाता है

Note –

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बिरजू को देखते ही पहेचान जाती है कि यह तो बिरजू चोर है।। गौरी का पति बिरजू को अपने घर मै रहने के लिए अनुमति देता है।।

गौरी अचानक से अपने पति को घर में आने के लिए बोलती है और कहती है “हमें अभी के अभी मेरी मा के घर जाना है उनकी तबीयत खराब है”

बिरजू दीवार में कान लगाकर उनकी सभी बाते सुनता है जिसका पता गौरी को था

गौरी ने फिर से एक और तरकीब लगाई अपने घर के दीवारों को ठीक करने के लिए और रंग करने के लिए ।।

गौरी अपने पति के साथ जोर से बोलने लगी “मैंने खजाने से निकले सारे सोने के गहने और माला दीवारों में छुपा दिया है”


Moral stories in hindi

बिरजू गौरी की बात सुनकर हसने लगा और मन ही मन मुस्कुराने लगा ।।

गौरी और उसका पति दोनों अपने मा के घर चले गए ।।बिरजू ने घर को अकेला देखकर पूरे घर में तोड़फोड़ सुरु कर दिया और घर की सारी दीवारों से तोड़कर ठीक कर दिया ।।

गौरी की योजना फिर से एकबार सफल हो गई। बिरजू सारी रात फिर से मेहनत करके असफल रहा ।।


Moral stories in hindi 

सुबह गौरी घर लौटकर घर का हाल देख कर अपने पति से कहने लगी-

“वैसे भी तो अगर हम किसी को दीवार तोड़ने के काम मै लगाते तो उसे पैसा देना पड़ता ”

“चोर की वजह से यह काम आसानी से खतम हो गया अभी सिर्फ हमें रंग करवाना है”

इसी तरह गौरी बिरजू को बार बार उल्लू बनाकर अपना काम करवाती और बिरजू इस तरह असफल हो कर गौरी का पीछा कर देता है और किसी दूसरे गांव में चला जाता है।।

Moral Of The Story –

लालच इंसान को अंधा बना देती है,लालच के कारण इंसान अपनी बुद्धि का सही उपयोग करना भूल जाता है ।।
लालच से किया गया कर्म कभी भी फल दायक नहीं होता।।


Moral Stories In Hindi : For Class 8

  • Panchatantra Stories In Hindi Images  – जिसकी लाठी उसकी भैंस –

प्रीतमपुर नाम के एक गांव में माखनलाल नाम का एक दूधवाला रहता था

वह बहत ही ईमानदार दूधवाला था कभी भी अपने दूध में मिलावट नहीं करता था

मिलावट न करने के कारण पूरे गांव में उसके दूध का बहत नाम था और सभी उसी से दूध खरीद ते थे।।

दिन प्रति दिन उसके दूध का तुलना मैं लोगो का उसके दूध के प्रति बिस्वास और प्यार बड़ता गया

पूरा गांव उससे ही दूध खरीद ता इसीलिए एक समय ऐसा आया कि उसके पास गाय तो थी

लेकिन दूध की मात्रा कम होने की वजह से वह पूरे गांव में दूध अच्छी तरह से सबको दूध प्रदान नहीं कर पाता था ।

गांव के कई लोगो को उसके तबेले से निराश घर जाना पड़ता था


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इस परेशानी से निकाल ने के लिए माखनलाल ने एक और गाय खरीद ने का निश्चय किया।।

माखनलाल पास के गांव मै जाता है जिस गांव का नाम राजपुर था जहा से उसने 6 महीने पहले तीन गाय खरीदा था।।

माखनलाल को देखकर तबेला का मालिक उसको पूछने लगा कि अचानक एक और गाय की जरूरत की किस कारण पड़ी


Moral stories in hindi

माखनलाल ने तबेले के मालिक को अपना उद्देश्य बताया और उससे एक गाय खरीद लिया और अपनी गांव की चल पड़ा।।

प्रीतमपुर गांव और राजपुर गांव के बीच मै एक जंगल था और माखनलाल को गाय खरीदने में और रास्ता बहत लंबा होने के कारण बहत समय पार हो गया था और धीरे धीरे अंधेरा होने लगा था।।

माखनलाल जंगल में अपनी गाय को लेकर अकेला जा रहा था अचानक एक डाकू माखनलाल के सामने आया।

माखनलाल को अपनी गाय उसके हवाले करने की चेतावनी देने लगा वरना डाकू उसको अपनी लाठी से मार डालेगा ऐसे उसको डराने लगा।।

माखनलाल ने बड़ी ही चालाकी से अपनी गाय को डाकू के हवाले कर दिया और उसकी ऐसी हालत देख कर डाकू उसपर हसने लगा


Moral stories in hindi 

डाकू को लगा माखनलाल बहत ही कमजोर इंसान है और माखनलाल को कहने लगा “तुम तो बड़े ही डरपोक हो मेरे एक चेतावनी से ही डर गए”

माखनलाल बोला ” जीते जी बहत गाय खरीद लूंगा अगर जान बच गई” यह सुनकर डाकू हसने लगा तभी माखनलाल ने गाय के बदले डाकू को अपनी एक चीज देने के लिए बोला

माखनलाल ने गाय के बदले डाकू से अपनी लाठी देने की मांग की और डाकू ने बिना कुछ सोचे माखनलाल को दुर्बल और कमजोर समझ कर अपनी लाठी माखनलाल के हवाले कर दिया।।


Moral stories in hindi 

माखनलाल को जैसे ही लाठी मिला उसने डाकू को अपनी असली साहस का परिचय दिया और डाकू को अपनी कुकर्म का दंड दिया और डाकू डर कर वहा से भाग गया ।।

माखनलाल ने अपनी शक्ति और बुद्धिमता का परिचय देते हुए अपने खुद की और गाय की रक्षा की और गाय को लेकर अपने घर शकुशल लौट आया।।

Moral Of The Story –

“जिसकी लाठी उसकी भैंस” इस कहानी से हमें ऐसी ही कुछ सीख मिलती है।।

इसके अलावा हमें यह भी सीखना चाहिए कि अगर जीवन में ऐसी कभी भी परिस्थिति आती है तो हमें अपनी बुद्धि और शक्ति का सामान नियंत्रण रख कर ही कार्य संपादन करना चाहिए ।

>Moral Stories In Hindi >> Part – 01 Ended 

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